बंद करो अब ये
फ़िक्र करना
अपनापन दिखाना
और
मोहब्बत जताना
इस मोहब्बत से ज्यादा
खुशी देती है अब
तुम्हारी बेरुख़ी...
क्यूंकि मैं
इस फ़िक्र, अपनेपन
और मोहब्बत
असली चेहरे को,
झूठा है ये बिल्कुल
आकाश में खिले
फूलों की तरह,
बस इसलिये
अब बंद करो
मुझे बहलाने की सारी
चेष्टायें अपनी
इन मिथ्या चेष्टाओं
से ज्यादा
खुशी देती है मुझे
तुम्हारी बेरुखी...
तुम्हारे,
मेरी मायुसियां
और सच कहूँ तो
तुम्हारे इन मौजूदा झूठे
लफ्ज़ों से ज्यादा
दुख देती हैं
तुम्हारी वो हरकतें
और दोहरा चरित्र
जो उन अतीत में की हुई
बातों को भी झूठा करार देता है
जिन्हें सच मान
मैं,
तुम्हारी इबादत किया करता था
खैर,
तुम क्या जानों
सच्ची इबादत, आस्था
और मोहब्बत
कितना रोती है
ठगाये जाने पर।।।

