वो
दिखाने के लियेप्रेम,
रहम और अपनापन
पूछते थे सदा
आदमी की पहचान...
और
लिहाज से ही होती थी
उसपे बरकत
और कीमत
क्युंकि
इस जहाँ में
होना काफी नहीं है
सिर्फ एक इंसान,
पूछते हैं तुमसे
हो तुम हिन्दु
या फिर मुसलमान
पर असल में
नहीं है
ये भी
आदमी की पहचान...
बस रह गये हैं कुछ नाम
वो या तो है
बेवश
भूखा
लाचार
या परेशान...........।।
