Friday, August 23, 2013

बारिश

हसरत थी
इस दिल की ज़मीं पे
प्यार का गुल खिलाने की,
एक गुस्ताख़ चाहत थी
आसमां के चाँद को
ज़मीं पे लाने की।
ख़्वाहिश थी
कि अहसास
की बारिश में मन 
भीग जाए,
पतझड़ सी तन्हा
ये फ़िज़ा
बीत जाए।


पर इन नासमझ 
ख़्वाहिशों की भी
अजब दास्ताँ है...
मोहब्बत की बारिश से
मन भी भीगा
पतझड़ भी बीता
बंजर ज़मीं का
सूखापन भी रीता..



पर बारिश तो बारिश है 
सनम!
जिससे भीग तो जाती हैं
हथेलियाँ
पर हाथ कुछ
नहीं आता।

30 comments:

  1. सच है, यही तो है जीवन।

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    1. सही कहा प्रवीणजी।।।

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  2. Replies
    1. धन्यवाद अल्तमश।।।

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  3. कोशिशॆ अक्सर कामयाब हो आस होती है उदास ना हॊ
    ख्वहिशॆ अक्सर पूरी होती है परेशान ना हॊ
    मौसम का क्या है मेरे भाई
    इसका टू मिजाज़ है बदलना
    इसके बदलने से निराश ना हॊ

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    1. शुक्रिया संगीता दी।।।

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  4. पर बारिश तो बारिश है
    सनम!
    जिससे भीग तो जाती हैं
    हथेलियाँ
    पर हाथ कुछ
    नहीं आता।

    कितनी सुन्दर पंक्तियाँ !
    बेहतरीन

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    Replies
    1. शुक्रिया शिवनाथ जी।।।

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  5. क्या बात है ,बहुत उम्दा पंक्तियाँ ....

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    1. धन्यवाद आपका...

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  6. जिससे भीग तो जाती हैं
    हथेलियाँ
    पर हाथ कुछ
    नहीं आता।

    सही कहा ,

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    Replies
    1. शुक्रिया शौर्यजी।।।

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  7. तेरी तलाश में मेरा वजूद ही न रहा,
    तबाह कर गई मेरी हस्ती को आरजू तेरी ।।

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    1. ताबिश भाई धन्यवाद।।।

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  8. पर इन नासमझ
    ख़्वाहिशों की भी
    अजब दास्ताँ है...
    मोहब्बत की बारिश से
    मन भी भीगा
    पतझड़ भी बीता
    बंजर ज़मीं का
    सूखापन भी रीता..
    बहुत खूब !

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    Replies
    1. धन्यवाद सर।।।

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  9. उन भीगी हथेलियों को देखो ...कुछ खट्टी-मीठी यादें ज़रूर उभरेगी ....
    शुभकामनायें!

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    1. सही है अशोकजी..शुक्रिया प्रतिक्रिया के लिये।।।

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  10. बहुत सुंदर भाव और खुबसूरत प्रस्तुति !!

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    1. रंजनाजी धन्यवाद।।।

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  11. बहुत सुंदर और भावपूर्ण ......

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    Replies
    1. शुक्रिया आपका।।।

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  12. जिससे भीग तो जाती हैं
    हथेलियाँ
    पर हाथ कुछ
    नहीं आता।

    ..... सुन्दर पंक्तियाँ !
    बेहतरीन
    शब्दों की मुस्कराहट पर....तभी तो हमेशा खामोश रहता है आईना !!

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    1. संजयजी धन्यवाद..आपकी उन तमाम प्रतिक्रियाओं के लिये जो आपने मेरी तमाम कविताओं पे दी।।।

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  13. ये सच है की हाथ कुछ नहीं आता ...
    पर भीगने से भी कहां है रुका जाता ... यही तो नशा है इस मुहब्बत का ...

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    1. बात तो सही कही दिगम्बर जी..पर कई बार ठगाए जाने के अहसास भी होता है..शुक्रिया प्रतिक्रिया के लिये।।।

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  14. सुन्दर पंक्तियाँ !बेहतरीन

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  15. Truly an Inspirational poem Ankur...I am touched by these lines:
    पर इन नासमझ
    ख़्वाहिशों की भी
    अजब दास्ताँ है...
    मोहब्बत की बारिश से
    मन भी भीगा
    पतझड़ भी बीता
    बंजर ज़मीं का
    सूखापन भी रीता..



    पर बारिश तो बारिश है
    सनम!
    जिससे भीग तो जाती हैं
    हथेलियाँ
    पर हाथ कुछ
    नहीं आता।
    Incredible job !!

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    Replies
    1. धन्यवाद महोदय...

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